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उन मिल कामगारों या मजदूरों की बेटियों को उच्च शिक्षा प्रदान करना था, जो घर के पास में गर्ल्स कॉलेज नहीं होने और सामाजिक प्रबंधन के कारण उच्च शिक्षा से वंचित रह जाती हैं। कॉलेज BA में 45 छात्राओं के साथ शुरु हुआ था।


1990 के बाद शहर की सभी कॉटन टेक्सटाइल मिलें एक-एक कर बंद होती गईं। श्रमिक वर्ग बेरोजगार हो गया। मानवीय आधार पर यह एक सामाजिक संकट था। उस समय भी कॉलेज इन बेरोजगार मिल मजदूरों की बेटियों को किफायती शिक्षा प्रदान करता रहा।
 


कॉलेज शहर के पूर्व में मिल क्षेत्र में स्थित है। हुकमचंद मिल इन्दौर के मालिक मन्नालाल ओंकारलाल अग्रवाल के परिवार से संबंधित ओंकार परमार्थिक ट्रस्ट द्वारा 2 अगस्त 1982 को कॉलेज प्रारंभ हुआ।


ओंकार चेरिटी ट्रस्ट से एक अनुबंध के तहत कॉलेज म.प्र. राज्य सरकार में स्थानांतरित कर दियागया। अत: 11-08-2009 को कॉलेज देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इन्दौर के अधिनस्थ कॉलेज बन गया। अब देवी अहिल्या विश्वविद्यालय कॉलेज   More...


1982 में इन्दौर शहर के श्रमिक बहुल क्षेत्र में उच्च शिक्षा संस्था प्रारंभ की गई। कॉलेज की पहली बैच के ग्रेजूएट्स का पोस्ट ग्रेज्यूएशन करने के बाद बडी संख्या में यहां के विद्यार्थी केन्द्रीय/राज्य सरकार के कार्यालय...    More...

कॉलेज को महिला विद्यार्थियों की दो पीढियों को शिक्षित करने की सन्तुष्टि है। आज भी क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्रदान करने वाला यह पहला शिक्षण संस्थान है। गर्ल्स गवर्नमेन्ट कॉलेज यहाँ से 11 किमी दूर है।

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